Sunday, May 7, 2017

वंदिगी

                                 वंदिगी 

अल्लाह की वंदिगी 
वो कर रहमत मेरी 
हो अगर तेरा साथ 
खिल उठेगी बगिया भी मेरी 
तेरी इनायत के रुतबे 
नजरे कर्म अब मुझ पर भी कर दे 
हूँ मैं तो तेरा छोटा सा नग्मा 
अपनी वंदिगी मुझ में भी भर दे 
रोशनी वो चाँद की 
रुतबा ए मस्जिद का 
खुशबू वो चादर की  मुझ पर भी कर दे 
चाहत वो तेरी दुआ की 
मेरी मुकम्मल कर भी दे 
महरून हो जाती माथे की लकीरे 
तेरी इबादत ऐ सुकून में  
दे दे मुझे रजा या सजा 
हूँ तेरी शिकस्त मे मैं  
हूँ तेरी शिकस्त मे मैं  
  

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