तीसरा तोहफा
शैशवावस्था के २ वर्ष पूरे करने के बाद अब तुम बाल्यावस्था में प्रवेश कर चुके हो जहाँ तुम्हारी हर हरकत को शब्दों में बयां कर पाना बहुत मुश्किल है फिर भी मेरी कोशिश है कि तुम्हारी हर हरकत जो मेरे चेहरे पर मुस्कान लाती है खट्टी मीठी बातें तुम्हारी नादानियाँ बयां करती है और हर बात को दो बार कहने की आदत कभी कभी मेरे अंदर झुंझलाहट पैदा करती है इन सभी को सदा के लिए बिना धुंधला किये सवाँर सकूँ |
सुना है बच्चा जो देखेगा वही सीखेगा क्योकि तुमने अभी तक अपनी उम्र के बच्चो को खिलौनों से खेलते नहीं देखा था तो तुम्हारे अंदर वो बच्चा वो बचपन नहीं आया तुम्हारी दुनिया मम्मी , पापा , दादी , दादा के इर्द गिर्द घूमती रही है जिससे तुम्हारे अंदर घर के काम करने की लालसा होती है सुबह शाम जब भी आटा गुथा जाता है तो तुम्हारे लिए थोड़ा ज्यादा लगाया जाता है क्योकि तुम्हें अपनी रोटी खुद बनानी है हाथ से बेलन लेकर भागने पर कभी कभी मुस्कान आ जाती है तो कभी कभी आंखों को बड़ा करके तुम्हें डराया जाता है जिस पर तुम खिलखिला उठते हो और ये जिद्द दिन ब दिन बढ़ती जा रही है कितना ही तुम्हें बहलाया फुसलाया पर तुम्हें आटा इतना प्रिय क्यूँ है आज तक मैं समझ नहीं पायी हूँ |
नयी माँ होने के नाते मुझे अभी पता नहीं है कि अच्छी परवरिश की क्या परिभाषा होती है| लेकिन जब भी मुझसे हर बात मेँ कहा जाता है कि मैंने तुम्हें बिगाड़ दिया है या उसको दो कौड़ी का कर दिया है तो मुझे बुरा लगता है चाहे मैंने तुम्हारे जो किया हो मैं इतना जानती हूँ कि तुम्हारे लिए बुरा हो ऐसा मैंने कुछ नहीं किया तुम्हारी हर छोटी चीज़ का ध्यान रखती हूँ जिससे तुम्हें परेशानी न हो , जब भी तुम तुम बीमार होते हो तो , तुमसे ज्यादा तक़लीफ़ मुझे होती है जहाँ कही तुम्हारी ज़िद ज्यादा बढ़ती है वहाँ तुम्हें थप्पड़ से प्यार से समझाती हूँ फिर मैंने तुम्हें दो कौड़ी का कैसे कर दिया है ? इसी वर्ष तुम्हारे जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ है शिक्षा का अध्याय |
जब तुम पहले दिन अपने स्कूल गए तब मुझे अंदर से अच्छा नहीं लग रहा था या कहुँ एक डर था कि तुम अकेले कैसे रहोगे , कहीं गिर न जाओ , खाना खुद से कैसे खाओगे , और अपने डर को छिपाते हुए मैंने तुम्हें बताना शुरू कर दिया कि डरना नहीं , शु -शु आये तो मैडम को बता देना, खाना खा लेना और कुछ |
ये तो थी पहले दिन की कहानी , जब तुम्हें थोड़ा समझ आया की वहाँ मम्मी के बिना रहना है तो दूसरे दिन से लेकर स्कूल की छुट्टी होने तक तुम्हें स्कूल भेजना बहुत मुश्किल भरा काम हो गया है अब वही प्रक्रिया जुलाई से फिर शुरू करनी होगी , स्कूल से वापस आने पर जब तुम अपनी मासूमियत भरे चेहरे से नादानियाँ भरी बातें सुनाते हो कि आज मैंने आप - आप खाना खाया था , माधव ने मुझे धक्का मार दिया , मैंने मन्नू का खाना खा लिया , उसमें बहुत मिर्च थी ( तुमने मन्नू का खाना क्यूँ खाया ? अपना खाना खाते है , गुस्से में कहते हुए ) और फिर ढेर सारा प्यार , तुम्हारी इन बातों और भोलेपन पर करती हूँ |
स्कूल का आठवां दिन जिंदगी का सबसे यादगार दिन है मेरे लिए , क्योकि जब तुमने स्कूल से आते ही कहा - मम्मी मैं केक्टर ( कलेक्टर ) बनुँगा और ये बात मैंने फिर से पूछी - क्या बनोगे केक्टर , तुम्हारे इन बालमन के भावों पर मुझे हसीं आ रही थी और कहीं न कहीं तुम्हें तुम्हारे सपने की छवि में देख रही थी , और पूरे दिन इस बात की रट को सुनती रही समझती रही , साथ में हर काम को हाथ लगाना तुम्हारे लिए खेल है कभी - कभी अत्यधिक भागीदारी हमारे अंदर इतनी झुंझलाहट पैदा कर देती है कि न चाहते हुए भी थप्पड़ मारना पड़ता है| खैर , उम्र भी अभी शुरू हुई है अगर हर बात को बच्चा समझने लग जाये तो वो बच्चा नहीं समझदार बड़ा है ,पर हम बड़ो की भी आदत है हर चीज़ को तुम्हारे हाथ से छुड़ाने की , हर बात पर टोकने की , तो शायद वही आदत तुम भी सीख रहे हो |
ये वर्ष तुम्हारे लिए अनेकों नए अनुभव के साथ आयी है जिसमें तुम्हारा मुंडन संस्कार जिस पर तुम चीख चीख कर रोये कि हाथों की मुट्ठी बनाकर तुम्हारे लिए जरुरी है कह कर सहन करना था ये तुम्हारे लिए अनुभव ही था कि अब तुम बिना रोये यहाँ तक कि बाल काटते समय हसते हुए बात करते हो सीख गए |
अपने पापा की तरह की तरह तुम्हें भी puppy से डर नहीं लगता , अमूमन बच्चे इस उम्र में थोड़ा हिचकते है पर तुम इतनी आसानी से उन्हें घर में लाकर दूध पिलाने की ज़िद्द करते हो , तो अच्छा लगता है |
हम अपना बचपन भूल जाते है बैसे ही जैसे मेरी माँ तुम्हारी नानी मुझे अक्सर बताया करती है कि मुझे भी बचपन में कलर करना ,चित्र बनाना बहुत पसंद था बैसे ही तुम्हें भी कलर करना अच्छा लगता है
हाँ आम, केला ,संतरा के साथ साथ पूरी किताब पर कलर होता है वो बात अलग है |
वैसे तो ब्रज की भाषा की साख पूरी दुनिया में मिसाल कायम करती है , ब्रजभाषा में ही न जाने कितनी संस्कृतियां किताबों में गढ़ दी गयी है पर आधुनिकता को देखते हुए जो प्रतिस्पर्धा आज के समय में चल रही है उसमें सबसे पहले भाषा को ही तवज्जो दिया जाता है कि फलाने का बेटा , नाती ,छोरा और भी बहुत कुछ की बोली कितनी अच्छी है लेकिन जब तुमसे तुम्हारी अम्मा , हरामज़ादे , काम न काज को ढाई मन अनाज को , जब देखो तब खावे खावे की केहतो रहेगो , अपने बाप से कहदे , बाबा से ही कहेगो , कुआँ में जा गिर , और जब तुम ज्यादा रो देते हो तो हाथ पकड़कर घसीटते हुए घर से निकालती है तो डर लगता है , कि कहीं तुम्हारे बालमन हीन भावना से न भर जाये , वैसे तो तुम स्वयं भगवान रूप हो , लेकिन साथ ही साथ कच्ची मट्टी के समान भी , जिस रूप में ढालोगे उसी रूप में पकोगे भी |
ईश्वरतुम्हें लम्बी उम्र,सद्बुद्धि प्रदान करे , ज़िंदा ज़िन्दगी जियो | पिछले पत्र की तरह मेरी भावना तुम्हें कथा कहानी न लगे|
तुम्हारी प्यारी मम्मी