Wednesday, February 20, 2019

लकीरें खींच गयी मुल्क में
बाँट लिया गया आसमान
धोखे और छल ने लूटी
समाज की इंसानियत
वतन की आजादी को कायम
सरहद के ताबुओ में है
माँ का इंतज़ार ,
माँ के आँचल को तड़पा तो
खाक-ए-सुपुर्द हुआ
लघु बह गया बनकर कुर्बानी
उड़ी पतंग जैसे कटी डोर जिंदगी की
हाथ आयी बन तिरंगा ,
और रह गयी बस एक निशानी || 

Saturday, February 16, 2019

क्या लिखुँ जहाँ एक और देश के वीर जवान साजिश का शिकार हो गए है वही दूसरी ओर युवा श्रद्धांजलि दे रहे है
श्रद्धांजलि शब्द बहुत छोटा लग रहा है उनकी शहादत के आगे सोशल मीडिया पर आक्रोश जताया जा रहा है  जवानो को नमन किया जा रहा है  और असल जिंदगी में शाहगर्दी के बाद भी valentine day  मनाया गया
शहीदों की अमरता लिखुँ शहादत लिखुँ बूढ़ी माँ का विलाप लिखुँ या अपनी कायरता लिखुँ जो हम हाथ पर हाथ  रखे बस  श्रद्धांजलि दे रहे है  क्या शहीदों की कुर्बानी किसी व्याख्यान की मोहताज़ है या फिर किसी श्रद्धांजलि की  श्रद्धांजलि देने से पहले जाकर देखो उनकी चौखट पर वर्षो का इंतज़ार मिलेगा देखो उस सुनी माँग को जो  अब इंतज़ार भी नहीं कर सकती 

Tuesday, February 5, 2019


प्रकृति की जड़ चेतना को पकड़ने की होड़ इंसान को क्या ही समझ आएगी जब उसे खुद से किये वादों के लम्हें ही हर आईने के सामने बदलते नजर आते है 


 तीसरा तोहफा  शैशवावस्था के २ वर्ष पूरे करने के बाद अब तुम बाल्यावस्था में प्रवेश कर चुके हो जहाँ तुम्हारी हर हरकत को शब्दों में बयां कर पान...